अनुराग ने ट्विटर पर पोस्ट कर लिखा -
जस्टिस शर्मा का बेटा और बेटी दोनों को 2025 में केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पैनलों में रखा गया है।
ये सब पॉलिटिकल अपॉइंटमेंट ही होते हैं, सरकार अपनी मर्जी के लोगों को पैनल में रखती है।
तुषार मेहता सबसे बड़ा सरकारी वकील है। इस हिसाब से जस्टिस स्वर्णकांता के बेटे और बेटी का बॉस ही हुआ?
क्या ये conflict of interest नहीं है?
क्या जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट में तुषार मेहता के खिलाफ बिना पक्षपात कोई फ़ैसला आ सकता है?
जो मोदी सरकार केजरीवाल जी के खिलाफ खुलेआम साज़िश कर रही है, वो सरकार जस्टिस शर्मा (जिनके पास केजरीवाल व अन्य AAP नेताओं के कई केस चल रहे हैं) के बेटा बेटी को सभी पैनल में क्यों रख रही है?
और सबसे अतार्किक बात जो समझ से परे है वो ये कि conflict of interest है या नहीं ये सुनवाई भी जस्टिस स्वर्णकांता खुद अपने ही कोर्ट में करेंगी।
इंसाफ़ हो न हो, होते हुए दिखे तो सही।
Editor- Amit Jha
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