पुलिस अधिकारी के मुताबिक , एक गिरफ़्तारी से जुड़ी जानकारी देने के लिए मिर्ज़ापुर पुलिस ने एसपी अपर्णा कौशिक की प्रेस ब्रीफिंग का वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया था।

पांच दिन पहले अपलोड हुए इस वीडियो को 47 लाख बार देखा गया है और लगभग 65 हज़ार लोगों ने इस पर कमेंट किए हैं।
लेकिन ज़्यादातर सोशल मीडिया यूज़र्स ने पुलिस के कामकाज पर टिप्पणी करने के बजाय एसपी की क़द-काठी को लेकर भद्दे कमेंट किए।
बॉडी शेमिंग का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने इस पोस्ट में कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया।
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, 47.5 फ़ीसदी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने स्कूल या कार्यस्थल पर बॉडी शेमिंग का सामना किया है।
एक तथ्य यह भी है कि 32.5 फ़ीसदी मामलों में नकारात्मक टिप्पणियां किसी अजनबी ने नहीं, बल्कि क़रीबी दोस्तों ने की थीं।
किसी महिला की शारीरिक बनावट पर अशोभनीय, अपमानजनक अथवा अश्लील टिप्पणियां करना उसकी गरिमा और सम्मान के मूल अधिकार का उल्लंघन है।
बीएनएस की धारा 79 (महिला की मर्यादा का अपमान), धारा 294 (अश्लील कृत्य/शब्द) और धारा 356 (मानहानि) के तहत यह अपराध की श्रेणी में आ सकता है। साथ ही इसमें आईटी एक्ट 2000 की धारा 66ई (गोपनीयता का उल्लंघन) और 67 (अश्लील सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण) भी लागू हो सकती हैं।
Editor-Amit Jha
0 Comments