यह सवाल इस लिए महत्वपूर्ण है क्यू की
दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में काम करने वाले हजारों बंगाली प्रवासी मजदूर इन दिनों डर और अनिश्चितता के बीच जी रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों को लेकर उनके मन में यह आशंका बैठ गई है कि अगर उन्होंने वोट नहीं डाला, तो कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा न दिया जाए।
यह सच है कि चुनाव से ठीक पहले SIR इसी संकेत का पुष्टी करता है । हर राज्य के लोगों को अपने वोटिंग अधिकार बचाने के लिए चुनाव आयोग बिना सोचे समझे इस तरह के प्रावधान लाती है।
इसी डर के चलते बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांव लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है—ट्रेन टिकटों की भारी कमी और भीड़भाड़। कई लोग महंगे दामों पर भी टिकट नहीं पा रहे हैं, जबकि कुछ मजबूरी में बसों या अन्य साधनों का सहारा लेने की सोच रहे हैं।
Editor- Amit Jha
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