सड़क हादशों पर सरकार के बड़े - बड़े दावों के बीच कागज के किसी पन्नों मे अंकित कोई भी आंकरा सिर्फ एक दस्तावेज या रद्दी कागज के रूप मे कही परा होगा ।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत मे सिर्फ पिछले पांच सालों मे करीब 9 हजार से अधिक लोगों ने सड़क पर गढ़्ढ़े की वजह से अपनी जान गवा चुके है ।
न कोई जिम्मेदारी न कोई प्रभावसाली सवाल करने वाला जो सरकार को इस पर जमीनी स्तर पर काम करने को मजबूर करे ।
रोज कागज के पहले पन्नों पर बड़ी सी प्रधानसेवक की तस्वीर और किसी नाम बदले या घोटाले की आर चढ़े स्ट्रक्चर का शिलान्यास या उद्घाटन समारोह की कुछ पंक्ति यही दिनचर्या है उन जिम्मेदार माध्यमों का जिनके उपर जनता के सवालों की उम्मीद टंगी है ।
भारत अब भारत सा नही, सर्वे भवन्तु सुखिन: का मंत्र चंदे दियंतु सुखिन: मे बदल गया है ।
Editor- Amit Jha
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