भारत जहां विश्व गुरू बनने की बात कर रहा वही शिक्षा के क्षेत्र मे बजट का महज 2.6% खर्च करना विश्व गुरू की ओर बढ़ते कदम को बहोत बड़ा गैप दिखा रहा ।
दिल्ली के पुर्व विधायक सह शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिय ने ट्विटर पर लिखा -
विश्वगुरु बनने के बड़े-बड़े दावों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। इस साल शिक्षा मंत्रालय को सिर्फ ₹1.39 लाख करोड़ का बजट मिला है। जहाँ अमेरिका और फ़िनलैंड जैसे विकसित देश अपनी शिक्षा पर करीब 6% खर्च करते हैं, वहीं भारत में यह आज भी मात्र 2.6% के आसपास ही अटका हुआ है।
क्या बच्चों की पढ़ाई में बिना निवेश किए 5 ट्रिलियन इकॉनमी का सपना पूरा होगा?
या ये सब भी सिर्फ चुनावी भाषणों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाएगा?
Editor- Amit Jha
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